
सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) भारत सरकार द्वारा पेश की गई एक लोकप्रिय बचत योजना है, जो विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाई गई है। साल 2025 में आयकर नियमों में हुए कुछ बदलावों ने इस स्कीम में निवेश करने वालों के लिए टैक्स से जुड़ी कई अहम बातें स्पष्ट की हैं। यदि आप SCSS में निवेश कर रहे हैं या करने का विचार कर रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि इस पर कितना टैक्स लगता है और किन प्रावधानों के तहत छूट मिलती है।
धारा 80C के अंतर्गत छूट
SCSS में किया गया निवेश आयकर अधिनियम की धारा 80C के अंतर्गत आता है, जिसके तहत एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम ₹1.5 लाख तक की कटौती का लाभ लिया जा सकता है। यह सुविधा केवल उन्हीं निवेशकों को उपलब्ध है जो पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Regime) को अपनाते हैं। यदि आप नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को चुनते हैं, तो इस धारा के अंतर्गत कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी। इसलिए निवेश करने से पहले टैक्स सिस्टम का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए।
SCSS पर मिलने वाला ब्याज
SCSS स्कीम पर वर्तमान में लगभग 8.2% की दर से ब्याज मिलता है, जो तिमाही आधार पर जमा होता है। यह ब्याज आय निवेशक की कुल सालाना आय में जुड़ता है और उस पर लागू टैक्स स्लैब के अनुसार कर लिया जाता है। यानी यह ब्याज पूरी तरह से टैक्स योग्य होता है। यदि किसी वित्तीय वर्ष में ब्याज ₹50,000 से अधिक हो जाता है, तो बैंक या पोस्ट ऑफिस स्रोत पर ही टैक्स (TDS) काट सकते हैं।
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धारा 80TTB के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों को अतिरिक्त राहत
वित्त वर्ष 2025 की टैक्स गाइडलाइन के अनुसार, वरिष्ठ नागरिकों को धारा 80TTB के तहत ₹50,000 तक की ब्याज आय पर अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है। यह छूट खास तौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाई गई है, जिससे वे बैंक, पोस्ट ऑफिस या अन्य जमा योजनाओं से प्राप्त ब्याज आय पर राहत पा सकें। SCSS के ब्याज पर भी यह छूट लागू होती है, जिससे टैक्स देनदारी कम हो सकती है।
नई टैक्स व्यवस्था में SCSS की स्थिति
यदि आप नई टैक्स व्यवस्था को अपनाते हैं, तो SCSS पर मिलने वाली छूट सीमित हो जाती है। इसमें धारा 80C के तहत कोई लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन धारा 80TTB के तहत ₹50,000 तक की ब्याज आय पर छूट जारी रहेगी। इसका अर्थ है कि नई टैक्स व्यवस्था को अपनाने वाले वरिष्ठ नागरिकों को केवल ब्याज पर छूट मिलेगी, निवेश की राशि पर नहीं। इसलिए यह जरूरी है कि आप अपनी कुल आय, टैक्स स्लैब और निवेश की योजना के अनुसार टैक्स सिस्टम का चयन करें।
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