
घर या प्रॉपर्टी खरीदना हर व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य होता है। कई लोग अपनी पूरी ज़िंदगी की कमाई लगाकर एक सपना पूरा करते हैं — अपना घर। लेकिन प्रॉपर्टी खरीदते वक्त की गई कुछ छोटी-छोटी लापरवाहियां भविष्य में बड़े कानूनी विवाद का कारण बन सकती हैं। खासकर, प्रॉपर्टी रजिस्ट्री (Property Registry) के समय की गई ग़लतियां बहुत महंगी साबित हो सकती हैं।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि रजिस्ट्री के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, खासकर गवाहों (Witnesses) के चयन में क्या नियम लागू होते हैं।
घर या प्रॉपर्टी खरीदते समय भावनाओं में बहना स्वाभाविक है, लेकिन यह जरूरी है कि प्रॉपर्टी रजिस्ट्री (Property Registry) जैसे कानूनी दस्तावेजों में पूरी सतर्कता बरती जाए। खासकर, गवाहों के चयन में कानूनन तय नियमों का पालन करें, ताकि भविष्य में कोई कानूनी झंझट न खड़ा हो। याद रखें, एक छोटी सी गलती जीवनभर की पूंजी और शांति को खतरे में डाल सकती है।
प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के दौरान क्यों जरूरी होते हैं गवाह?
जब भी कोई व्यक्ति मकान, जमीन या अन्य कोई संपत्ति खरीदता है, तो उसकी कानूनी प्रक्रिया में सबसे अहम कदम होता है रजिस्ट्री (Registry)। रजिस्ट्री की प्रक्रिया को वैधानिक रूप देने के लिए कम से कम दो गवाहों की जरूरत होती है। ये गवाह इस बात की पुष्टि करते हैं कि संपत्ति की बिक्री पारदर्शी और दोनों पक्षों की सहमति से हो रही है।
सरकार ने रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए गवाहों को लेकर कुछ खास नियम तय किए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है।
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कौन बन सकता है प्रॉपर्टी रजिस्ट्री का गवाह?
रजिस्ट्री के दौरान किसी को भी गवाह बना देना उचित नहीं होता। इसके लिए कुछ कानूनी नियम होते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नीचे बताया गया है कि किन लोगों को गवाह बनाया जा सकता है और किन्हें नहीं।
18 साल से कम उम्र के व्यक्ति नहीं बन सकते गवाह
कानून के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति जो 18 वर्ष से कम उम्र (Minor) का है, उसे रजिस्ट्री के समय गवाह नहीं बनाया जा सकता। इसकी वजह यह है कि कानूनन नाबालिग किसी भी वैधानिक दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने के लिए सक्षम नहीं माना जाता।
खरीदार और विक्रेता खुद नहीं बन सकते गवाह
रजिस्ट्री के नियमों के अनुसार, प्रॉपर्टी का खरीदार (Buyer) और प्रॉपर्टी का विक्रेता (Seller) खुद को गवाह के रूप में नामांकित नहीं कर सकते। ऐसा इसलिए क्योंकि गवाह का काम निष्पक्ष होना चाहिए, जबकि खरीदार और विक्रेता खुद इस सौदे के पक्षकार होते हैं।
मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को गवाह नहीं बनाया जा सकता
यदि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ (Mentally Unfit) है, तो वह रजिस्ट्री में गवाह नहीं बन सकता। रजिस्ट्री एक कानूनी दस्तावेज़ है और इसके लिए आवश्यक है कि गवाह मानसिक रूप से पूरी तरह सक्षम हो, ताकि वह भविष्य में किसी कानूनी प्रक्रिया में अपनी बात स्पष्ट रूप से रख सके।
क्यों जरूरी है सही गवाह का चयन?
गलत गवाह के कारण भविष्य में रजिस्ट्री को अवैध ठहराया जा सकता है या अदालत में मुकदमे की स्थिति बन सकती है। खासकर जब संपत्ति को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, तब गवाह की भूमिका बहुत अहम हो जाती है। अगर गवाह ही मान्य नहीं है, तो पूरी रजिस्ट्री को चुनौती दी जा सकती है।
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रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता और वैधानिकता
सरकार की कोशिश रही है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और फर्जीवाड़े से बचा जा सके। इसी के तहत गवाहों को लेकर नियम सख्त किए गए हैं। गवाहों की पहचान के लिए उनके वैध पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी आदि) की प्रति भी प्रस्तुत करनी होती है।
संपत्ति खरीदने से पहले क्या-क्या जांचें?
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले सिर्फ रजिस्ट्री ही नहीं, बल्कि निम्नलिखित बातों की भी गहराई से जांच करनी चाहिए:
- प्रॉपर्टी के मालिकाना हक की वैधता
- भूमि के उपयोग की स्थिति (Agricultural/Residential)
- प्रॉपर्टी पर कोई कर्ज या कानूनी विवाद तो नहीं
- बिल्डर या विक्रेता की विश्वसनीयता
- आवश्यक सरकारी अनुमतियां और नक्शे