
Recurring Deposit (RD) भारतीय निवेशकों के लिए एक सुरक्षित और नियमित बचत का विकल्प है, जो अपनी मासिक आय का कुछ हिस्सा निवेश करने का इच्छुक होता है। विशेषकर, अगर आप ₹5,000 मासिक निवेश करते हैं, तो आपको पांच वर्षों में किस प्रकार का रिटर्न प्राप्त हो सकता है, यह सवाल कई निवेशकों के मन में आता है। हम इस लेख में इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे और समझेंगे कि आपके ₹5,000 मासिक निवेश पर 5 साल के बाद कितना रिटर्न मिलेगा।
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क्या है एक Recurring Deposit?
Recurring Deposit (RD) एक वित्तीय उत्पाद है जो विशेष रूप से उन लोगों के लिए है, जो नियमित रूप से बचत करना चाहते हैं। इसमें निवेशक हर महीने एक निश्चित राशि बैंक में जमा करता है और उस पर तय ब्याज दर के अनुसार रिटर्न प्राप्त करता है। इस प्रकार, RD निवेशकों को उनकी धनराशि पर नियमित ब्याज प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। इसे मुख्य रूप से भारतीय बैंकों द्वारा उपलब्ध कराया जाता है और इसकी अवधि आमतौर पर 6 महीने से लेकर 10 वर्षों तक होती है।
₹5,000 मासिक निवेश पर 5 वर्षों में रिटर्न
जब आप ₹5,000 प्रति माह की राशि निवेश करते हैं, तो आपकी कुल निवेश राशि 5 वर्षों में ₹3,00,000 (₹5,000 × 60 महीने) हो जाएगी। अब सवाल यह उठता है कि इस पर मिलने वाला रिटर्न कितना होगा। भारतीय बैंकों में RD की ब्याज दरें आमतौर पर 5% से 7% के बीच होती हैं। उदाहरण के लिए, यदि एक बैंक की ब्याज दर 6% वार्षिक है, तो 5 वर्षों के अंत में आपको लगभग ₹18,000 का अतिरिक्त रिटर्न मिल सकता है, जो आपकी कुल जमा राशि से अलग होगा।
यह ब्याज दर समय के साथ बदल सकती है और कंपाउंडिंग विधि पर निर्भर करती है। कुछ बैंकों में ब्याज प्रत्येक तिमाही या मासिक आधार पर कंपाउंड होता है, जिससे रिटर्न में वृद्धि होती है।
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निवेश की अवधि का महत्व
आवर्ती जमा के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है उसकी अवधि। जितना लंबा समय होगा, उतना ही अधिक रिटर्न मिलेगा, क्योंकि ब्याज दरों का कंपाउंडिंग पर असर होता है। 5 वर्षों का समय एक अच्छा विकल्प हो सकता है क्योंकि इस दौरान आपकी राशि पर नियमित रूप से ब्याज कंपाउंड होता है। इससे आपका रिटर्न बढ़ सकता है।
ब्याज दर और RD की विशेषताएँ
ब्याज दर एक महत्वपूर्ण पहलू है, क्योंकि इसका सीधा असर आपके रिटर्न पर होता है। भारतीय बैंक RD के लिए 5% से 7% तक ब्याज दर प्रदान करते हैं। यह ब्याज दर बैंक द्वारा निर्धारित की जाती है और इसमें समय-समय पर बदलाव हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर आप एक बैंक में 6% ब्याज दर पर RD खोलते हैं, तो आपको हर तिमाही या मासिक आधार पर ब्याज मिलेगा। इस ब्याज का फिर पुनर्निवेश होता है, जिससे कंपाउंडिंग के लाभ मिलते हैं।
क्या है RD का टैक्स प्रभाव?
आरडी पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगता है। यदि आपके द्वारा अर्जित ब्याज ₹40,000 से अधिक है, तो आपको टैक्स चुकाना होगा। इस पर TDS (Tax Deducted at Source) भी काटा जाता है, जो आपकी आय के आधार पर निर्धारित होता है। यदि आप टैक्स से बचना चाहते हैं, तो आप अपनी आय कर रिटर्न के दौरान इसे दावा कर सकते हैं।
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