LTV Ratio in Home Loan: लोन टू वैल्यू (LTV) रेशियो क्या होता है और यह होम लोन को कैसे प्रभावित करता है?

होम लोन में LTV रेशियो यह दर्शाता है कि बैंक आपकी प्रॉपर्टी की कीमत के मुकाबले कितना लोन देगा। यह रेशियो आपकी ब्याज दर, EMI और लोन की स्वीकृति को सीधे प्रभावित करता है। कम LTV रेशियो से लोन लेना आसान, सस्ता और सुरक्षित बनता है। इस लेख में हमने विस्तार से समझाया है कि LTV क्या है और यह होम लोन में कैसे भूमिका निभाता है।

By Pankaj Singh
Published on
LTV Ratio in Home Loan: लोन टू वैल्यू (LTV) रेशियो क्या होता है और यह होम लोन को कैसे प्रभावित करता है?

होम लोन (Home Loan) लेने से पहले जो बातें ध्यान में रखनी चाहिए, उनमें एक बेहद अहम पहलू है LTV Ratio यानी Loan-to-Value रेशियो। यह एक ऐसा अनुपात है जो यह दर्शाता है कि संपत्ति की कुल कीमत में से बैंक आपको कितना लोन देने को तैयार है। उदाहरण के तौर पर, अगर आपकी प्रॉपर्टी की कीमत ₹50 लाख है और बैंक ₹40 लाख का लोन मंज़ूर करता है, तो आपका LTV रेशियो 80% होगा।

यह भी देखें: सिर्फ ₹50 रोज बचाकर बनें करोड़पति! 10,000 की सैलरी में भी बनेगी बड़ी दौलत – जानें कैसे

LTV Ratio की गणना कैसे होती है

LTV रेशियो का फॉर्मूला सीधा और सरल है:
LTV (%) = (लोन राशि / प्रॉपर्टी का कुल मूल्य) × 100
उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति ₹60 लाख की प्रॉपर्टी खरीद रहा है और ₹48 लाख का लोन ले रहा है, तो LTV रेशियो होगा 80%। यह रेशियो इस बात को दर्शाता है कि ऋणदाता कितना जोखिम उठा रहा है। जितना अधिक LTV, उतना अधिक जोखिम बैंक के लिए होता है।

बैंक LTV रेशियो के आधार पर क्या निर्णय लेते हैं
बैंक या वित्तीय संस्थान आम तौर पर LTV रेशियो के आधार पर ही यह तय करते हैं कि वे लोन कितनी राशि तक देंगे और उस पर ब्याज दर क्या होगी। भारत में होम लोन के लिए आमतौर पर निम्नलिखित सीमाएं होती हैं:

  • ₹30 लाख तक की प्रॉपर्टी पर अधिकतम 90% तक LTV
  • ₹30 लाख से ₹75 लाख तक की प्रॉपर्टी पर अधिकतम 80% तक
  • ₹75 लाख से अधिक की प्रॉपर्टी पर अधिकतम 75% तक

यह नियम Reserve Bank of India-RBI द्वारा निर्धारित किए गए हैं और सभी बैंक व NBFC इन्हीं का पालन करते हैं।

LTV रेशियो का प्रभाव ब्याज दर और शर्तों पर

Loan-to-Value रेशियो जितना कम होगा, बैंक को उतना ही कम जोखिम होगा, जिससे ब्याज दरें कम हो सकती हैं और लोन की स्वीकृति जल्दी हो सकती है। दूसरी ओर, अगर LTV ज्यादा है तो बैंक अतिरिक्त सुरक्षा की मांग कर सकते हैं, जैसे कि ज्यादा ब्याज दर, Loan Insurance या गारंटर। इसलिए, जो लोग ज्यादा डाउन पेमेंट कर सकते हैं, उनके लिए लोन लेना ज्यादा आसान और सस्ता साबित होता है।

यह भी देखें: Fixed Deposit: 365 दिन की FD पर शानदार ब्याज, आप भी उठाएं फायदा

कम LTV कैसे मदद करता है होम लोन में

कम LTV रेशियो से लोन लेने वाले को कई फायदे मिलते हैं—ब्याज दर कम होती है, स्वीकृति जल्दी मिलती है और लोन की शर्तें भी आसान होती हैं। यह लोन की EMI को भी नियंत्रित रखता है, जिससे लंबे समय में आपकी वित्तीय स्थिरता बनी रहती है।

LTV Ratio को कम कैसे किया जा सकता है

अगर आप चाहते हैं कि आपका LTV रेशियो कम हो, तो इसके लिए सबसे प्रभावशाली तरीका है अधिक Down Payment करना। इससे आपकी लोन राशि कम हो जाती है और आपके पास बैंक के सामने एक मजबूत प्रोफाइल बनती है। इसके अलावा, अगर आपकी प्रॉपर्टी का मूल्य बढ़ा हुआ हो, या आप समय पर लोन चुका रहे हों, तो भी आपके रेशियो में सुधार हो सकता है।

FAQs

LTV रेशियो क्या होता है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
LTV रेशियो यह दिखाता है कि आपने जितनी मूल्य की प्रॉपर्टी खरीदी है, उसमें से कितना हिस्सा बैंक फंड कर रहा है। यह ऋणदाता के जोखिम और लोन की शर्तों को तय करने में मदद करता है।

LTV रेशियो का अधिकतम मान कितना हो सकता है?
भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार, ₹30 लाख तक के लोन के लिए अधिकतम 90% LTV की अनुमति होती है। अधिक मूल्य वाली संपत्तियों के लिए यह रेशियो घटता जाता है।

कम LTV होने से मुझे क्या लाभ होगा?
कम LTV होने पर बैंक को कम जोखिम होता है, जिससे आपको कम ब्याज दर और बेहतर लोन शर्तें मिल सकती हैं।

क्या LTV रेशियो का असर मेरे EMI पर भी पड़ता है?
जी हां, कम लोन राशि यानी कम EMI। इससे आपकी मासिक किस्तें आसान हो जाती हैं और कुल ब्याज कम लगता है।

क्या LTV रेशियो सभी बैंकों में एक जैसा होता है?
नहीं, हालांकि RBI द्वारा सीमा तय की जाती है, लेकिन अलग-अलग बैंक और NBFC अपने आंतरिक जोखिम मापदंडों के अनुसार थोड़ी बहुत भिन्नता कर सकते हैं।

यह भी देखें: Post Office Scheme: सिर्फ ₹1000 निवेश करें और पाएं ₹1 लाख! जानें यह धमाकेदार स्कीम और पूरी कैलकुलेशन

Author
Pankaj Singh

Leave a Comment

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें