
पटना, राज्य ब्यूरो। बिहार में चल रहे भूमि सर्वेक्षण (Bihar Land Survey) कार्य को लेकर राज्य सरकार ने रैयतों को बड़ी राहत दी है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री सरावगी ने स्पष्ट किया है कि जिनके पास अभी जितने भी जमीन से संबंधित कागजात उपलब्ध हैं, उनके आधार पर ही स्वघोषणा (Self Declaration) जमा की जा सकती है। इसके लिए सभी जरूरी कागजातों की अनिवार्यता फिलहाल नहीं है। बाकी कागजातों को किस्तवार एवं खानापुरी की प्रक्रिया के दौरान जमा करने की सुविधा दी जाएगी।
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यह निर्णय गुरुवार को आयोजित एक अहम समीक्षा बैठक में लिया गया, जिसमें राज्य के अलग-अलग जिलों में स्वघोषणा जमा करने की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि स्वघोषणा की तिथि बढ़ाई जा सकती है, इसके लिए तकनीकी और कानूनी बाधाओं के अध्ययन का आदेश दे दिया गया है।
अब तक प्राप्त हुईं 1.15 करोड़ स्वघोषणाएं
बैठक में जानकारी दी गई कि 31 मार्च 2025 तक राज्य में कुल 1,15,91600 (एक करोड़ पंद्रह लाख 916) स्वघोषणाएं प्राप्त हुई हैं। ये ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जमा की गई हैं। राज्य सरकार को उम्मीद है कि यह संख्या बढ़कर 1.35 करोड़ तक पहुंच सकती है।
इन आंकड़ों में उन 36 जिलों के 445 अंचलों में जमा की गई स्वघोषणाएं भी शामिल हैं, जहां भूमि सर्वेक्षण का दूसरा चरण चल रहा है। गौरतलब है कि पूरे बिहार में कुल लगभग 4 करोड़ जमाबंदी हैं, जिन्हें डिजिटाइज करने और अद्यतन करने की दिशा में यह प्रयास किया जा रहा है।
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तिथि विस्तार की संभावना पर विचार
स्वघोषणा की अंतिम तिथि को लेकर आम जनता में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन अब मंत्री ने इस पर स्पष्टता दी है। उन्होंने तिथि विस्तार की संभावनाओं पर विचार करने और उससे जुड़ी कानूनी और तकनीकी अड़चनों के अध्ययन के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिया है। इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि सरकार जल्द ही तिथि विस्तार को लेकर कोई ठोस निर्णय ले सकती है।
पिछड़े जिलों को 15 दिन का अतिरिक्त समय
समीक्षा बैठक में यह बात भी सामने आई कि कुछ जिलों में स्वघोषणा जमा करने की गति काफी धीमी रही है। इस पर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर सुधार लाने का निर्देश दिया है।
विशेष रूप से जिन जिलों की स्थिति खराब रही है, उनमें पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण के कुछ अंचल प्रमुख हैं। पश्चिम चंपारण के बेतिया, पिपरासी, मधुबनी, ठकराहा, और भितहा तथा पूर्वी चंपारण के पिपराकोठी, तुरकौलिया, बनकटवा, छौड़ादानो और रक्सौल अंचलों में स्वघोषणा की संख्या अत्यंत कम पाई गई है। उदाहरणस्वरूप, बेतिया सदर में मात्र 187 और पिपरासी में सिर्फ 524 स्वघोषणाएं अब तक प्राप्त हुई हैं।
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कुछ जिलों में उत्साहजनक प्रदर्शन
जहां कुछ अंचल पिछड़े हैं, वहीं दूसरी ओर कई अंचलों ने बेहतरीन प्रदर्शन भी किया है। अररिया सदर, जौकीहाट, फारबिसगंज, पलासी, दरभंगा के बिरौल, बहेड़ी और कुशेश्वर स्थान, समस्तीपुर का कल्याणपुर और औरंगाबाद का नबीनगर ऐसे अंचल हैं जहां बड़ी संख्या में रैयतों ने स्वघोषणा जमा की है।
मंत्री ने इन जिलों के अधिकारियों को सराहना के साथ अन्य जिलों के लिए प्रेरणा स्रोत बनने का सुझाव दिया।
डिजिटल प्लेटफॉर्म का बढ़ता उपयोग
सरकार की कोशिश है कि अधिकतम लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए स्वघोषणा जमा करें। इससे प्रक्रिया पारदर्शी, सुगम और समयबद्ध हो सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में इसके लिए विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं और आईटी-सहायता केंद्र की भी स्थापना की गई है।
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राज्य सरकार का लक्ष्य है कि भूमि रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन के माध्यम से संपत्ति विवादों को खत्म कर एक पारदर्शी भू-अभिलेख प्रणाली विकसित की जा सके।