
होम लोन इंश्योरेंस एक विशेष प्रकार की बीमा पॉलिसी होती है जो उधारकर्ता की मृत्यु या स्थायी अक्षमता जैसी स्थितियों में बकाया लोन का भुगतान करती है। इस इंश्योरेंस का मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि उधारकर्ता की अनुपस्थिति में उनके परिवार पर लोन चुकाने का दबाव न आए और घर की संपत्ति सुरक्षित रहे। इस पॉलिसी की अवधि आमतौर पर लोन की अवधि जितनी होती है और इसका प्रीमियम एकमुश्त या किस्तों में भरा जा सकता है।
यह भी देखें: Post Office Scheme: सिर्फ ₹1000 निवेश करें और पाएं ₹1 लाख! जानें यह धमाकेदार स्कीम और पूरी कैलकुलेशन
होम इंश्योरेंस और होम लोन इंश्योरेंस में फर्क
अक्सर लोग होम इंश्योरेंस और होम लोन इंश्योरेंस को एक जैसा समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में बड़ा अंतर होता है। होम इंश्योरेंस संपत्ति को प्राकृतिक आपदा, आग या चोरी जैसी घटनाओं से होने वाले नुकसान से कवर करता है। वहीं, होम लोन इंश्योरेंस केवल बकाया लोन राशि को कवर करता है और केवल तभी सक्रिय होता है जब उधारकर्ता की मृत्यु या असमर्थता जैसी घटनाएं घटित होती हैं।
क्या होम लोन इंश्योरेंस लेना अनिवार्य है?
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और बीमा नियामक संस्था IRDAI के नियमों के अनुसार, होम लोन इंश्योरेंस लेना पूरी तरह से वैकल्पिक है। कोई भी बैंक या वित्तीय संस्था इसे ज़बरदस्ती नहीं कर सकती, हालांकि वे इसकी सलाह जरूर देते हैं। कई बार लोन अप्रूवल के दौरान ग्राहक को ऐसा महसूस कराया जाता है कि यह अनिवार्य है, लेकिन ग्राहक के पास इसे न लेने का पूरा अधिकार होता है।
जोखिम से सुरक्षा और मानसिक शांति
होम लोन इंश्योरेंस का सबसे बड़ा फायदा है मानसिक शांति। लोन लेने वाला व्यक्ति यह जानते हुए आश्वस्त रहता है कि उसकी अनुपस्थिति में उसके परिवार को घर से हाथ नहीं धोना पड़ेगा। इसके अलावा, कुछ पॉलिसियाँ क्रिटिकल इलनेस और नौकरी छूटने जैसे मामलों में भी कवर देती हैं, जिससे अप्रत्याशित परिस्थितियों में भी लोन भुगतान जारी रह सकता है।
यह भी देखें: Post Office Savings Scheme: न्यू टैक्स रिजीम के बाद क्या पोस्ट ऑफिस की स्कीम से मिलेगा लाभ? यहाँ जानें
टर्म इंश्योरेंस: एक बेहतर विकल्प?
कई वित्तीय सलाहकार मानते हैं कि टर्म इंश्योरेंस होम लोन इंश्योरेंस का एक बेहतर विकल्प हो सकता है। टर्म इंश्योरेंस व्यापक सुरक्षा कवरेज देता है, और उसकी राशि उपयोगकर्ता की आवश्यकता के अनुसार तय की जा सकती है। इसमें लचीलापन होता है, और यह कई बार अधिक किफायती भी साबित होता है। परिवार को एकमुश्त राशि मिलती है, जिससे न सिर्फ लोन चुकाया जा सकता है बल्कि अन्य ज़रूरतों का भी ध्यान रखा जा सकता है।
टैक्स लाभ और अन्य फायदे
होम लोन इंश्योरेंस पर दिया गया प्रीमियम आयकर अधिनियम की धारा 80C के अंतर्गत टैक्स छूट के योग्य होता है। हालांकि यह लाभ सीमित होता है, लेकिन निवेशकों के लिए यह एक अतिरिक्त आकर्षण हो सकता है। इसके साथ ही यह बीमा पॉलिसी बैंकों और NBFCs के लिए भी सुरक्षा का साधन होती है, जिससे वे भी इसे लेने की सिफारिश करते हैं।
(FAQs)
प्रश्न: क्या बैंक होम लोन इंश्योरेंस लेना ज़रूरी बना सकते हैं?
उत्तर: नहीं, यह पूरी तरह से ग्राहक की इच्छा पर निर्भर है। RBI और IRDAI के अनुसार, इसे अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता।
प्रश्न: क्या होम इंश्योरेंस और होम लोन इंश्योरेंस एक ही हैं?
उत्तर: नहीं, होम इंश्योरेंस प्रॉपर्टी को कवर करता है, जबकि होम लोन इंश्योरेंस लोन की बकाया राशि को।
प्रश्न: टर्म इंश्योरेंस लेना ज्यादा बेहतर है या होम लोन इंश्योरेंस?
उत्तर: टर्म इंश्योरेंस अधिक लचीला, व्यापक और अक्सर किफायती विकल्प हो सकता है। यह व्यक्तिगत आवश्यकता पर निर्भर करता है।
प्रश्न: क्या होम लोन इंश्योरेंस में नौकरी जाने या बीमारी का भी कवरेज होता है?
उत्तर: कुछ विशेष योजनाओं में ये लाभ होते हैं, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त प्रीमियम देना पड़ सकता है।
यह भी देखें: Post Office Loan Scheme: अब पोस्ट ऑफिस से भी मिलेगा पर्सनल लोन, ऐसे करें तुरंत आवेदन