
भारत में प्रवेश करने, रहने या देश से बाहर जाने के लिए नए आव्रजन और विदेशी विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में मंजूरी दे दी है। इस विधेयक को केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया है, और अब यह कानूनी रूप से लागू हो चुका है। अब यह कानून (India Immigration New Law) बन चुका है, जो जाली पासपोर्ट या वीजा के उपयोग से संबंधित नए प्रावधानों के बारे में स्पष्टता प्रदान करता है। इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति भारत में प्रवेश करने या देश में रहने के लिए जाली पासपोर्ट या वीजा का इस्तेमाल करता है, तो उसे सात साल तक की जेल हो सकती है और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी हो सकता है।
नए कानून का प्रभाव और प्रमुख प्रावधान
इस नए कानून के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि विदेशियों के बारे में जानकारी देना अनिवार्य हो, विशेष रूप से होटलों, विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और नर्सिंग होम्स को विदेशियों के बारे में सूचना प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत, विदेशी नागरिकों का रिकॉर्ड रखा जाएगा, जो निर्धारित अवधि से अधिक समय तक भारत में रहते हैं। यह कदम सुरक्षा और प्रवासन पर कड़ी नजर रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
फर्जी पासपोर्ट या वीजा पर कड़ी सजा
अगर कोई व्यक्ति जाली पासपोर्ट या वीजा का इस्तेमाल कर भारत में प्रवेश करता है या देश से बाहर जाने की कोशिश करता है, तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी। ऐसे मामलों में, आरोपी को 7 साल तक की सजा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। यह प्रावधान भारत के लिए एक बड़ा सुरक्षा कदम है, जिससे कानून का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 के बीच भारत आने वाले 98.40 लाख विदेशी नागरिकों के आंकड़े जारी किए हैं, जो इस कानून के प्रभावी होने से सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक होंगे।
निरस्त होने वाले पुराने कानून
इस विधेयक के लागू होने से चार पुराने कानूनों को निरस्त किया जाएगा, जिनमें पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920, विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम 1939, विदेशियों का अधिनियम 1946, और आव्रजन (वाहक दायित्व) अधिनियम 2000 शामिल हैं। इन पुराने कानूनों की जगह यह नया विधेयक एक व्यापक और आधुनिक दृष्टिकोण से विदेशी नागरिकों और आव्रजन मामलों का प्रबंधन करेगा।