ChatGPT से बना फर्जी आधार-पैन कार्ड! बढ़ा साइबर ठगी का खतरा, यूजर्स रहें सावधान

AI की मदद से अब फर्जी दस्तावेज़ बनाना हुआ आसान! जानिए कैसे GPT-40 मॉडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर भी असली जैसा वोटर आईडी कार्ड तैयार किया और इसके दुरुपयोग के खतरों को लेकर क्या कह रहे विशेषज्ञ।

By Pankaj Singh
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ChatGPT से बना फर्जी आधार-पैन कार्ड! बढ़ा साइबर ठगी का खतरा, यूजर्स रहें सावधान
ChatGPT

जब OpenAI के GPT-40 मॉडल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर दस्तावेज़ बनाने को कहा गया, तो पहले उसने सुरक्षा उपायों का हवाला दिया और मना कर दिया। हालांकि, जब प्रॉम्प्ट को थोड़ा सा बदला गया, तो AI ने अपनी वार्निंग प्रणाली को दरकिनार कर एक असली जैसा वोटर आईडी कार्ड बना दिया। यह घटना दर्शाती है कि AI की मदद से दस्तावेज़ों की जालसाजी अब कितनी आसान हो गई है।

हाल तक, साइबर अपराधियों के लिए सरकार द्वारा जारी पहचान और नागरिकता दस्तावेज़ों की जालसाजी करना एक मुश्किल काम था। लेकिन अब GPT-40 जैसे एडवांस AI मॉडल्स ने इस काम को सरल और तेज बना दिया है। GPT-40, जो हाल ही में इंटरनेट पर स्टूडियो Ghibli स्टाइल की तस्वीरों से चर्चा में था, अब असली जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट और वोटर आईडी कार्ड भी बना सकता है। इस मॉडल के जरिए साइबर अपराधी किसी भी नाम और जानकारी के साथ फर्जी दस्तावेज़ बना सकते हैं, जो देखने में बिल्कुल असली लगते हैं।

AI से बने नकली दस्तावेज़ की प्रक्रिया और चिंता

GPT-40 का सबसे बड़ा खतरनाक पहलू यह है कि यह किसी असली व्यक्ति की जानकारी नहीं लेता, लेकिन प्रसिद्ध हस्तियों के नाम पर फर्जी दस्तावेज़ आसानी से तैयार कर सकता है। एक बार जब GPT-40 से फर्जी आधार कार्ड बनाने को कहा गया, तो जो परिणाम सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। इतना असली दिखाई देने वाला दस्तावेज़ कि एक एक्सपर्ट को भी उसमें मामूली गड़बड़ी पहचानने में मुश्किल हो सकती थी।

सिर्फ आधार कार्ड ही नहीं, GPT-40 इस AI का उपयोग करके पैन कार्ड, पासपोर्ट और वोटर आईडी कार्ड जैसे दस्तावेज़ भी बना सकता है। ये दस्तावेज़ आपस में मेल खाते हैं और बिल्कुल एक जैसे दिखते हैं, जिससे कोई भी व्यक्ति फर्जी पहचान बनाने में सक्षम हो सकता है। यह AI मॉडल इतने सटीक होते हैं कि नकली पहचान बनाना पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है।

AI का गलत इस्तेमाल और उसके संभावित खतरें

GPT-40 द्वारा निर्मित फर्जी दस्तावेज़ों का एक और खतरनाक पहलू यह है कि इससे नकली पेमेंट रिसिप्ट भी बनाई जा सकती हैं। उदाहरण के लिए, 100 रुपये के Paytm ट्रांजेक्शन का फर्जी रसीद जो मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देती है, असली और नकली के बीच का अंतर बताना मुश्किल हो सकता है। इस तरह के फर्जी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल साइबर अपराधियों द्वारा ठगी के लिए किया जा सकता है।

इसी प्रकार, GPT-40 का उपयोग करके एक फर्जी बैचलर डिग्री भी बनाई जा सकती है, जैसे एक ऐसा स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी का डिग्री, जो कभी अस्तित्व में नहीं थी। इस प्रकार के दस्तावेज़ों का गलत इस्तेमाल करने से यह साबित होता है कि इस AI मॉडल का दुरुपयोग साइबर अपराधियों के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है।

GPT-40 की सुरक्षा फीचर और भविष्य की दिशा

OpenAI इस खतरे से बचने के लिए कुछ सुरक्षा उपायों का पालन कर रहा है। GPT-40 से बने दस्तावेज़ों में C2PA मेटाडेटा जोड़ा गया है, जिससे यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि कोई फोटो या दस्तावेज़ AI ने तैयार किया है या नहीं। हालांकि, इसके बावजूद, यह सवाल उठता है कि क्या OpenAI को आधार और पैन कार्ड जैसे असली दस्तावेज़ों तक पहुंच मिली है, जो GPT-40 को ट्रेंड करने में इस्तेमाल किए गए हो सकते हैं।

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Pankaj Singh

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