1 साल में अगर इतना कैश बैंक अकाउंट में जमा किया तो Income Tax का पड़ेगा छापा

क्या आपने बैंक में नकद जमा किया है? अगर एक साल में ₹10 लाख या उससे ज्यादा कैश गया है अकाउंट में, तो अब आयकर विभाग की नजर आप पर है! नियमों की अनदेखी का मतलब है नोटिस, पूछताछ और कभी-कभी छापा भी। जानिए किन हालातों में आती है रेड और कैसे बचें इस मुसीबत से – पूरी जानकारी आगे पढ़ें...

By Pankaj Singh
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1 साल में अगर इतना कैश बैंक अकाउंट में जमा किया तो Income Tax का पड़ेगा छापा

1 साल में अगर आपने अपने बैंक अकाउंट में बड़ी मात्रा में नकद राशि जमा की है, तो यह Income Tax विभाग की निगरानी का कारण बन सकता है। विशेष रूप से जब यह नकद लेन-देन ₹10 लाख या उससे अधिक का हो, तो बैंक उस लेन-देन की रिपोर्ट आयकर विभाग को भेजते हैं। इसके बाद विभाग जांच कर सकता है कि इतनी बड़ी नकद राशि का स्रोत क्या है और क्या यह आयकर अधिनियम के दायरे में सही है या नहीं।

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₹10 लाख से ज्यादा नकद जमा पर कैसे बनती है रेड की स्थिति

आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, अगर आप एक वित्तीय वर्ष में ₹10 लाख या उससे अधिक नकद अपने बैंक के सेविंग अकाउंट में जमा करते हैं, तो यह रिपोर्टिंग के अंतर्गत आता है। यह रिपोर्ट बैंकों के जरिए सीधे आयकर विभाग के सिस्टम में जाती है। यदि किसी अकाउंट में बार-बार या एकमुश्त ₹10 लाख या उससे अधिक नकद देखा जाता है, तो यह संदिग्ध माना जाता है और छानबीन शुरू हो सकती है। यदि आपको स्रोत का प्रमाण नहीं देना आता है, तो रेड या नोटिस आना तय है।

एक दिन में ₹50,000 से अधिक नकद जमा पर पैन देना जरूरी

यदि कोई व्यक्ति एक ही दिन में ₹50,000 या उससे अधिक की नकद राशि बैंक में जमा करता है, तो उसे अपना PAN नंबर देना अनिवार्य है। बिना पैन के ऐसी राशि स्वीकार नहीं की जाती और कई बार यह लेन-देन रोका भी जा सकता है। आयकर विभाग इन जानकारियों के आधार पर यह सुनिश्चित करता है कि व्यक्ति की आय के स्रोत वैध हैं या नहीं।

नकद लेन-देन पर लगा है कानूनी प्रतिबंध

Income Tax Act की धारा 269ST के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक दिन में एक ही व्यक्ति से ₹2 लाख या उससे अधिक नकद नहीं ले सकता। इस नियम का उल्लंघन करने पर जितनी राशि प्राप्त की जाती है, उतनी ही पेनल्टी देनी पड़ सकती है। यह कानून काले धन के प्रवाह को रोकने के लिए लागू किया गया है और इसका उल्लंघन करने पर बिना किसी नोटिस के कार्रवाई हो सकती है।

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नकद निकासी पर भी देना पड़ सकता है TDS

अगर कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में अपने बैंक अकाउंट से ₹1 करोड़ से अधिक नकद निकालता है, तो उस पर 2% TDS लागू होता है। खास बात यह है कि अगर आपने पिछले तीन साल से Income Tax Return-ITR नहीं भरा है, तो यह सीमा ₹20 लाख तक घट सकती है और ₹1 करोड़ से ज्यादा निकासी पर 5% TDS देना पड़ सकता है। यानी न सिर्फ नकद जमा बल्कि निकासी पर भी विभाग की नजर रहती है।

बिना रिकॉर्ड के नकद जमा पर पूछताछ तय है

अगर आप बड़ी राशि नकद जमा कर रहे हैं और आपके पास उसका वैध स्रोत नहीं है जैसे बिक्री रसीद, गिफ्ट डीड या अन्य डॉक्युमेंट्स, तो आप पर आयकर विभाग की पूछताछ हो सकती है। इस तरह के मामलों में विभाग न सिर्फ पूछताछ करता है बल्कि आपकी पूरी वित्तीय जानकारी की जांच कर सकता है, जिससे छापा पड़ने तक की नौबत आ सकती है।

(FAQs)

प्रश्न: क्या मैं ₹10 लाख तक नकद जमा कर सकता हूं बिना किसी समस्या के?
उत्तर: हां, आप कर सकते हैं, लेकिन यदि राशि ₹10 लाख या उससे अधिक हुई तो बैंक इसकी रिपोर्ट आयकर विभाग को देगा और आपको इसका स्रोत प्रमाणित करना होगा।

प्रश्न: क्या किसी को नकद में ₹2 लाख से अधिक देना या लेना अवैध है?
उत्तर: हां, आयकर अधिनियम की धारा 269ST के अनुसार, एक दिन में ₹2 लाख या उससे अधिक की नकद प्राप्ति गैरकानूनी है।

प्रश्न: नकद निकासी पर TDS कब कटता है?
उत्तर: जब आपकी सालाना नकद निकासी ₹1 करोड़ से अधिक होती है। यदि आपने तीन वर्षों से ITR नहीं भरा है, तो यह सीमा ₹20 लाख से शुरू हो जाती है।

प्रश्न: क्या UPI या ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर भी ऐसे नियम लागू होते हैं?
उत्तर: नहीं, ये नियम विशेष रूप से नकद लेन-देन पर लागू होते हैं। डिजिटल लेन-देन पर इतनी सख्ती नहीं होती।

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