
जब भी कोई व्यक्ति अपना पहला घर खरीदने की योजना बनाता है, तो सबसे पहले जो सवाल उसके मन में आता है, वह है: होम लोन कहां से लें—बैंक से या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी (Housing Finance Company-HFC) से? यह निर्णय केवल ब्याज दरों पर आधारित नहीं होता, बल्कि इससे जुड़े नियम, पात्रता, ऋण की शर्तें और ग्राहक सेवा जैसे कई कारक भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में क्या फर्क है और किसकी शर्तें आपकी जरूरतों के अधिक अनुकूल हैं।
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ब्याज दरें और रेगुलेटरी लिंक
बैंक आमतौर पर रेपो रेट या MCLR के अनुसार ब्याज दरें तय करते हैं, जिससे आरबीआई (RBI) द्वारा पॉलिसी रेट में किए गए बदलाव का प्रभाव तुरंत ग्राहकों तक पहुंचता है। इसका मतलब यह हुआ कि यदि रेपो रेट घटती है, तो आपकी EMI भी जल्दी कम हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां अपनी ब्याज दरें प्राइम लेंडिंग रेट (PLR) के आधार पर तय करती हैं, जो उनकी इंटरनल नीति और बाजार के हालातों पर निर्भर करता है। इस वजह से HFCs की ब्याज दरें अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकती हैं और इन पर रेगुलेटरी बदलावों का प्रभाव धीरे-धीरे पड़ता है।
लोन अमाउंट और प्रॉपर्टी की वैल्यू
बैंक आमतौर पर प्रॉपर्टी की वैल्यू के अनुसार 80-90% तक का होम लोन देते हैं। हालांकि वे रजिस्ट्रेशन फीस या स्टांप ड्यूटी को लोन राशि में शामिल नहीं करते, जिससे आपकी जेब पर ज्यादा बोझ पड़ सकता है। वहीं HFCs प्रॉपर्टी की कुल लागत में इन अतिरिक्त खर्चों को भी जोड़कर अधिक लोन राशि देने के लिए लचीलापन दिखाते हैं। यह सुविधा उन ग्राहकों के लिए खासतौर पर फायदेमंद होती है जिनके पास डाउन पेमेंट के लिए सीमित फंड होता है।
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क्रेडिट स्कोर और पात्रता मानदंड
बैंकों द्वारा लोन देने की प्रक्रिया में क्रेडिट स्कोर एक महत्वपूर्ण कारक होता है। आमतौर पर 750 से ऊपर का स्कोर हो तभी बैंक आपको होम लोन देने में रुचि दिखाते हैं। यदि आपका स्कोर कम है, तो लोन की स्वीकृति मुश्किल हो सकती है या ब्याज दर ज्यादा लग सकती है। वहीं दूसरी ओर, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां इस मामले में ज्यादा लचीली होती हैं। वे सीमांत स्कोर वाले ग्राहकों को भी लोन देने के लिए तैयार होती हैं, हालांकि इसके बदले वे ब्याज दरों में कुछ वृद्धि कर सकती हैं।
प्रसंस्करण समय और दस्तावेज़ीकरण
होम लोन की प्रक्रिया में दस्तावेज़ीकरण और अनुमोदन का समय भी बड़ा फर्क पैदा करता है। बैंक अपने नियमों और गहन जांच प्रक्रिया के कारण लोन स्वीकृति में अधिक समय लेते हैं, वहीं HFCs ज्यादा तेज और सरल प्रक्रिया अपनाते हैं। यदि किसी को जल्दी फंडिंग की जरूरत है या जटिल दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो हाउसिंग फाइनेंस कंपनी एक बेहतर विकल्प बन सकती है।
ओवरड्राफ्ट सुविधा और लचीलापन
कई बैंक अब ओवरड्राफ्ट (Overdraft) सुविधा के साथ होम लोन देते हैं, जिससे आप अपनी EMI के ऊपर अतिरिक्त भुगतान कर ब्याज बचा सकते हैं, और जरूरत पड़ने पर उस अतिरिक्त राशि को वापस भी ले सकते हैं। यह लचीलापन लंबी अवधि में ब्याज लागत को कम करने में मदद करता है। लेकिन HFCs आमतौर पर इस तरह की ओवरड्राफ्ट सुविधा प्रदान नहीं करतीं, जिससे ग्राहक के पास लोन के प्रबंधन के विकल्प सीमित हो जाते हैं।
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